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मिड इंडिया अंडरब्रिज का निर्माण बंद करने से बढ़ी नाराजी, रेलवे जीएम व कलेक्टर को धारा 80 सीपीसी का नोटस – वार्ड 5 व 21 के हर मतदाता के लिए मांगी 1-1 लाख क्षतिपूर्ति – तय समय पर कार्य पूर्ण नहीं करना घोर लापरवाही, दोनों वार्ड के 30 हजार रहवासी भोग रहे हैं परेशानी

मिड इंडिया अंडरब्रिज का निर्माण बंद करने से बढ़ी नाराजी, रेलवे जीएम व कलेक्टर को धारा 80 सीपीसी का नोटस
– वार्ड 5 व 21 के हर मतदाता के लिए मांगी 1-1 लाख क्षतिपूर्ति
– तय समय पर कार्य पूर्ण नहीं करना घोर लापरवाही, दोनों वार्ड के 30 हजार रहवासी भोग रहे हैं परेशानी
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मंदसौर। मिड इंडिया रेलवे फाटक पर चल रहे अंडर ब्रिज के निर्माण कार्य को मंडल रेल प्रबंधक द्वाारा बंद करवाए जाने से पटरी पार रहने वाले करीब 30 हजार लोगों को काफी नाराजगी है। मंडल रेल प्रबंधक के पिछले दिनों यह कहते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया था कि रेलवे के नियमानुसार 7 मई के बाद गार्डर नहीं डाली जा सकती है। अब बारिश बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा। नाराज क्षेत्रवासियों के प्रतिनिधि के रूप में महेश कुमार मोदी,गोपाल गुप्ता एवं अनिल शर्मा की ओर से हाईकोर्ट एडवोकेट डॉ. राघवेंद्रसिंह तोमर ने जनरल मैनेजर पश्चिम रेल्वे चर्चगेट मुम्बई व कलेक्टर, मंदसौर को धारा 80 सीपीसी के तहत नोटिस भेज कर अंडर ब्रिज के समीप 300 मीटर क्षेत्र में नागरिकों को दो पहिया वाहन के लिए रास्ता देने तथा वार्ड 5 व 21 के प्रत्येक मतदाता को 1-1 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति देने के लिए कहा है। 60 दिन (दो माह) के भीतर वांक्षित सहायता प्रदान नहीं की जाती है तो सक्षम न्यायालय में दीवानी वाद लगाया जावेगा तथा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका प्रस्तुत की जाएगी।
मामले में एडवोकेट डॉ. तोमर ने बताया कि रेलवे द्वायरा मिड इंडिया रेलवे फाटक क्रमांक 151 B पर 17.01.2020 को अंडर ब्रिज बनाने के लिए आवागमन को पूर्ण रूप से बंद कर दिया था। इससे पूर्व इस फाटक को लेकर क्षेत्र की जनता की ओर से एक प्रतिनिधिक दीवानी वाद गोपाल गुप्ता आदि विरुद्ध भारत शासन आदि के विरुद्ध दिनांक 07.10.2009 को प्रस्तुत किया था, जिसका प.क्र. 41A/2006 व अंतिम निर्णय दिनांक 20.01.2009 को जनता के पक्ष में हुआ। जो संक्षिप्त में निम्म आशय का था “ रेल्वे फाटक क्र. 151B को तब तक बंद न किया जावे जब तक कि इस फाटक के स्थान पर 300 मीटर के अंदर ओव्हर ब्रिज/अंडर ब्रिज का निर्माण होकर आवागमन प्रारंभ नहीं हो जावे।” इस आशय की निषेधाज्ञा जारी की थी। आप परिवादी क्र. 1-2 ने न्यायालय के निर्णय का उल्लंघन कर एक तरफा फाटक बंद कर दी, जो आज दिनांक तक बंद है तथा ओव्हर ब्रिज/अंडर ब्रिज का निर्माण भी आज दिनांक तक नहीं हुआ, यानी करीब डेढ़ वर्ष से रेल्वे फाटक क्र. 151B बंद कर आवागमन अवैध रूप से बाधित कर रखा है। रेल्वे के इस कृत्य से सूचनाकर्तागण सहित करीब 30 हजार रहवासियों के स्वतंत्र रुप से आवागमन के संवैधानिक अधिकार का हनन कर उन्हें आर्थिक, मानसिक व शारीरिक पीढ़ा पहुंचाई है। रेलवे द्वारा फाटक क्र.151B को बंद कर वहां पर अंडरिब्रज का निर्माण करवाया जा रहा है। किंतु 18 माह बाद भी ब्रिज बनकर तैयार नहीं हुआ, यह आपकी घोर लापरवाही है।
एडवोकेट डॉ. तोमर ने प्रेस को दी जानकारी में सवाल खड़ा किया है कि ब्रिज निर्माण कर रहे ठेकेदार ने लगभग जनवरी 2021 में चारों ब्लॉक तैयार कर दिए और उन्हें रेल्वे लाइन के नीचे खिसकाने के लिए रेल्वे की रेल परिवहन की इलेक्ट्रीक लाइन हटाकर गार्डर पटरी लगाने के लए कहा, किंतु रेल्वे के अधिकारियों ने हाई टेंशन विद्युत लाइन के तार आज दिनांक तक नहीं हटाए और करीब 5 माह का समय बर्बाद कर दिआ । लगता है रेल्वे के अधिकारी किसी गुप्त मकसद से कार्य कर रहे थे। इस कारण उपरोक्तानुकार 1 वर्ष से अधिक समय बर्बाद करने के बाद दिनांक 8.5.2021 को ठेकेदार को नोटिस देकर आदेश दिया कि 7 दिन के अंदर 2 बड़ी क्रेन व अन्य मशीनें अनिवार्य रूप से मौके पर लावें। ठेकेदार द्वारा नोटिस के अनुसार मौके पर समस्त मशीनों की व्यवस्था कर दी जो आज दिनांक तक मौके पर ही मौजूद हैं। मंडल रेल प्रबंधक के अनुसार अगर 7 मई के पश्चात रेल्वे पटरी के नीचे किसी कार्य की अनुमति नहीं दी जा सकती है तो उन्होंने ठेकेदार को ब्लाक खिसकाने के लिए मशीनें बुलवाने के लिए दि. 8 मई 2021 को नोटिस क्यों दिया? दिनांक 01.06.2021 को DRM ने मीडिया को बताया कि रेल्वे का नियम है कि शेयरिंग बेसेस पर होने वाले कार्य में समस्त राशि जमा होने के उपरांत ही कार्य प्रारंभ किया जाता है किंतु मंडल रेल प्रबंधक ने अपनी रिस्क पर शेयरिंग की आधी राशि जमा होने पर ही अंडरब्रिज का निर्माण कार्य प्रारंभ करवा दिया क्यो?

*रेलवे विजिलेंस को भी करेंगे शिकायत*

रेल्वे ने अपने हिस्से का कार्य नियत समय पर न करते हुए अनुबंध की अवधि दो बार बढ़ाई। ठेकेदार द्वारा दो ब्लाक तैयार करने के पश्चात रेल्वे द्वारा सिग्नल व केबल ,डीपी इत्यादि दो माह तक नहीं हटाई, जिससे ठेकेदार का दो माह से अधिक समय बर्बाद हुआ। आखिर रेल्वे ने योजनाबद्द तरीके से अंडर ब्रिज निर्माण में समय पर अपनी ओर से सहयोग प्रदान क्यों नहीं किया। यह रेल्वे एवं जिला प्रशासन के जवाबदार अधिकारियों की घोर लापरवाही, तानाशाही व कर्तव्य हीनता दर्शाता है जोकि दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसी कर्तव्यपालन की जानबूझकर की गई लापरवाही को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग नई दिल्ली तथा चीफ विजिलेंस आफीसर पश्चिमी रेल्वे मुम्बई को शिकायत भी की जाएगी।

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